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भोजनथाली मेले में दंगल हो तो ही रात्रि कार्यक्रम हो अन्यथा नहीं: कवि डी के जैन मित्तल

रिपोर्टर मनमोहन गुप्ता कामां 9783029649

डीग जिले के कस्वा कामां में भोजन थाली मेला1दंगल को लेकर कस्वेवासियो में काफी रोष देखने को मिल रहा है ! राजनीति के चलते अबकी1बार2भी ये दंगल1का मेला नहभोजन थाली मेला भगवान श्री कृष्ण की क्रीडा स्थली ब्रज संस्कृति की पहचान है और इस मेले की पहचान कुश्ती दंगल से है जिसमें देश भर के कोने-कोने से पहलवान आते हैं अपना दाव पेंच खेलते हैं पूरे देश से इस मेले को देखने हजारों लाखों लोग आते हैं। यह मेला हमारे कामां क्षेत्र की पहचान है। यह कुश्ती दंगल मेला अबकी बार अवश्य होना चाहिए। नही तो सांस्कृतिक कार्यक्रम भी नही होने चाहिए !
पिछले दशकों में देखें तो कुश्ती दंगल मेला होता आया था, लेकिन कुछ पिछले सालों में यह मेला राजनीति की भेंट चढ़ गया और कभी प्रशासनिक स्वीकृति न मिलने, कभी किसी चीज की कमी बताकर इस मेले की अनुमति नहीं मिलती है और यह ऐतिहासिक कुश्ती दंगल मेला जो कि इस मेले की पहचान है वह नहीं कराया जाता है और इसके बजाय रात्रि कालीन के सांस्कृतिक कार्यक्रमों को इसमें कराया जाता है जिसमें जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स के पैसों को यूं ही बर्बाद किया जाता है। इस बार भी नगर पालिका के इस मेले के लिए 50 लाख रुपए स्वीकृत हुए हैं। और उस मीटिंग में यह तय हुआ कि मेले में कुश्ती दंगल की अनुमति लेकर आयेंगे और कुश्ती दंगल इस मेले में अवश्य देखने को मिलेगी। इसी तरह कुछ पिछले साल हुआ था लेकिन ऐन वक्त पर कुश्ती दंगल की अनुमति नहीं मिलती है जो की हमारे ब्रज क्षेत्र कामां की संस्कृति परंपराओं के साथ खिलवाड़ है। इस बार भी यही प्रतीत हो रहा है कि ऐसा ना हो कि ऐन वक्त पर दंगल की स्वीकृति न मिले और 50 लाख रुपए के बजट को नाच गाने पर ही उड़ाकर इति श्री कर दी जाती है !
इस बारे में मेरी राय यह है कि कुश्ती दंगल की अनुमति लेकर कुश्ती दंगल अवश्य करवाया जाए अगर किसी सूरत में कुश्ती दंगल नहीं होता है तो रात्रि कालीन सांस्कृतिक कार्यक्रमों को कराने का कोई औचित्य नहीं है।

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